Mahadev ki bhakti kaise karein ?
भगवान महादेव की भक्ति कैसे करें, उन्हें प्रसन्न करने और क्रोधित करने के कारण
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भगवान शिव, जिन्हें महादेव, भोलेनाथ और शंकर के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। वे परम तपस्वी, करुणामय, और सहजता से प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं। शिव भक्ति में सरलता और सच्ची श्रद्धा ही सबसे महत्वपूर्ण होती है।
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1. भगवान शिव की भक्ति कैसे करें?
महादेव को प्रसन्न करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
1. रुद्राभिषेक:
भगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद, गन्ने का रस, पंचामृत आदि से अभिषेक करें।
बेलपत्र (तीन पत्तों वाला) चढ़ाना विशेष फलदायी होता है।
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
2. सादगी और सच्ची भक्ति:
शिवजी को शुद्ध मन और प्रेम से पूजा करना ही सबसे श्रेष्ठ भक्ति मानी जाती है।
अहंकार और दिखावे से दूर रहकर भक्ति करें।
3. श्रावण मास में विशेष पूजन:
श्रावण मास में सोमवार को उपवास रखना और शिवलिंग पर जल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।
4. शिव चालीसा और शिव महापुराण का पाठ:
प्रतिदिन शिव चालीसा पढ़ना और शिव महापुराण सुनना पुण्यदायी होता है।
5. महामृत्युंजय मंत्र का जाप:
"ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥"
यह मंत्र दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ के लिए अति प्रभावी माना जाता है।
6. रात्रि में शिव पूजन:
शिवजी की आराधना विशेष रूप से रात्रि में की जाती है, क्योंकि वे ध्यान और समाधि में रहते हैं।
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2. भगवान शिव को क्या प्रसन्न करता है?
भगवान शिव को प्रसन्न करने के कुछ प्रमुख तत्व:
1. सच्चाई और सरलता: वे उन भक्तों से प्रसन्न होते हैं जो सत्य और ईमानदारी से जीवन जीते हैं।
2. निर्मल जल और बेलपत्र: शिवलिंग पर बेलपत्र और गंगाजल चढ़ाने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
3. रुद्राक्ष धारण करना: शिव भक्तों के लिए रुद्राक्ष पहनना शुभ माना जाता है।
4. अहंकार रहित आचरण: वे विनम्रता और सेवा भाव को पसंद करते हैं।
5. भस्म और त्रिपुंड: भस्म (राख) महादेव का प्रिय है और इसे लगाने से शिव कृपा प्राप्त होती है।
3. भगवान शिव को गुस्सा किस चीज से आता है?
महादेव को "भोलेनाथ" कहा जाता है, क्योंकि वे जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। लेकिन कुछ बातों से वे अत्यंत क्रोधित भी हो सकते हैं:
1. अहंकार और अधर्म:
अहंकार और अधर्म करने वाले को शिवजी कभी क्षमा नहीं करते।
रावण और भस्मासुर का विनाश इसी कारण हुआ।
2. शिवलिंग पर केतकी पुष्प चढ़ाना:
केतकी (केवड़ा) फूल शिवजी को अपवित्र मानते हैं, इसलिए इसे शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए।
3. झूठ और कपट:
असत्य और छल-कपट करने वालों से वे रुष्ट हो जाते हैं।
4. शिवलिंग को दूध चढ़ाकर नाली में बहाना:
शिव पूजा में चढ़ाया गया दूध, जल आदि पेड़-पौधों को अर्पित करना चाहिए, व्यर्थ नहीं करना चाहिए।
5. शिवरात्रि के दिन मद्यपान और मांसाहार:
शिव भक्तों को इस दिन पूरी तरह सात्त्विक आचरण रखना चाहिए।
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4. शिव पूजा करने का सही तरीका
1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. भगवान शिव को जल और पंचामृत से स्नान कराएं।
3. बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
4. धूप और दीप जलाकर "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
5. शिव चालीसा, रुद्राष्टकम, या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
6. शिव आरती करें और भोग अर्पित करें।
7. अंत में प्रार्थना करके क्षमा याचना करें।
निष्कर्ष
भगवान महादेव सरल हृदय वाले देवता हैं जो अपने भक्तों को सहजता से आशीर्वाद प्रदान करते हैं। सच्ची श्रद्धा, ईमानदारी और अहंकार रहित भक्ति से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। अतः यदि कोई सच्चे मन से उनकी आराधना करता है तो उसे जीवन में सुख, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
हर हर महादेव!
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लेखक: Rohit Saah, Social Public Worker
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